शेर और चालाक लोमड़ी
बहुत समय पेहले की बात है, एक घने जंगल में एक शेर रहता था। एक सुबह उनकी पत्नी ने उन्हें बताया कि "उनकी सांस बदबूदार और अप्रिय लग रही है"। यह सुनकर शेर शर्मिंदा और क्रोधित हो गया। वह इस बात सच है या नहीं जानने के लिए दुसरो का भी राय लेना चाहता था । इसलिए उसने तीन अन्य जानवरो को अपनी गुफा के बाहर बुलाया।
सबसे पहले भेंड़ो का समूह आया । शेर ने अपना मुंह खोलते हुए कहा, "भेड़, मुझे बताओ कि क्या मेरे मुंह से बदबू आ रही है?" भेड़ों ने सोचा कि शेर एक ईमानदार जवाब चाहता है, इसलिए भेड़ों ने कहा, “हाँ, दोस्त"। भेंड़ो ने कहा की "लगता है आपकी सांस में कुछ गड़बड़ है ”। यह बात शेर को बिलकुल अच्छा नहीं लगा और क्रोधित हो गया। उसने भेड़ों पर हमला किया, और सभी भेंड़ोको मार डाला।
तब शेर ने भेड़िये को बुलाया और कहा, “तुम क्या सोचते हो? क्या मेरी सांस से सच में बदबू आ रही है? भेड़िये ने देखा कि भेड़ के साथ क्या हुआ। वह इस प्रश्न के उत्तर में बहुत सतर्क रहना चाहता था। तो, भेड़िया ने कहा, "कौन कहता है कि आपकी सांस अप्रिय है। "यह गुलाब की महक जितनी मीठी है ”। जब शेर ने जवाब सुना, तो वह समझ गया की भेड़ झूट बोल रहा है और चापलूसी रहा है , इसीलिए शेर गुस्से में भड़क गया और तुरंत भेड़िया पर हमला किया और उसे मार डाला।
अंत में, लोमड़ी की बारी आई। शेर ने उससे वही सवाल पूछा की "लोमड़ी, मुझे बताओ कि क्या मेरे मुंह से बदबू आ रही है?" भेड़ और भेड़िये के साथ हुए घटना से लोमड़ी अच्छी तरह से वाकिफ थी। इसलिए उसने खाँसते हुए अपना गला बार-बार साफ किया और फिर कहा, “ओह मेरे दोस्त , पिछले कुछ दिनों से मुझे बहुत ठंड लग रही है"। इसके कारण, "मुझे कुछ भी सुखद या अप्रिय नहीं लग सकता है"।
शेर ने लोमड़ी की जान बख्श दी।
नैतिक [Moral]:
अपने आप को एक बुरी समय या एक बुरी स्थिति में समान रूप में शामिल न करें अन्यथा आप अपनी गलती के लिए दंडित हो सकते हैं। कभी-कभी, कुछ स्थितियों से दूर रहने में ही समझदारी है।
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